मन पतंग सा
मन पतंग सा
(गीत संग्रह)
गीतकार: पीयूष अवस्थी
समीक्षक: उत्तम सिंह
(प्रख्यात फिल्म संगीत निर्देशक, मुम्बई)
महकते गीतों का गुलदस्ता
आज शाइर, गीतकार पीयूष अवस्थी जी की वजह से एक सौभाग्य प्राप्त हुआ है, और वो सौभाग्य ये है कि मैं आशा जी के बारे में कुछ अपने शब्द बयान कर सका ! आशा जी के बारे में लिखना इतना कठिन काम है कि जिन्होंने सारी जिन्दगी गाने को तपस्या समझकर काम किया है,उनका एक-एक गाना उनकी तपस्या का फूल है,और आप सोचिये कि उन्होंने हजारों गाने गाये हैं, तो हजारों फूल हैं उनके पास,और उनके गाये हजारों फूल लोगों के पास !
मुझे उनके साथ काम करने के तमाम अवसर मिले, उनके साथ बहुत काम किया,और कमाल तो यह भी है कि जब-जब उनको देखा,तब -तब एक नई आशा नजर आई, एक उम्मीद नजर आई ! जब-जब वो आती थीं रिकार्डिंग में,तो उनके आने के पहले ही जब उनका नाम आता था कि आज आशा जी गाना गा रही हैं, तो इसका मतलब होता था, गाना बहुत अच्छा होगा,अगर कम्पोजिशन 40.50ः है तो आशा जी उसे 100ः कर देंगी,और अगर कम्पोजिशन 100ः है तो आशा जी उसे 500ः कर देंगी, ये आशा जी का कमाल रहा, और मैं तो उनका म्यूजीशियन रहा, मैंने बहुत वायलिन और हारमोनियम भी उनके साथ स्टेज पर बजाया, रिकार्डिंग में भी बजाया ! उनके साथ बहुत काम किया, उनके बहुत सारे गाने भी अरेन्ज किये, और मेरा सौभाग्य है कि उन्होंने मेरे लिए, बतौर मेरे संगीतकार के रूप में गाने गाये, जिसमें उन्होंने ‘‘वारिस’’ और कई पंजाबी फिल्मों में भी गाना गाया और उनका लगभग 25 वर्षों पहले गाया हुआ मेरी फिल्म ‘‘दिल तो पागल है’’ का गाना ‘‘ले गई-ले गई’’ आज भी हिट है ! आशा जी के साथ जो 40-45 वर्षों का समय गुजरा वो अद्भुत और बहुत यादगार और संगीतमय गुजरा !
‘‘मन पतंग सा’’, ये किताब का शीर्षक है और सचमुच ही आशा जी एक ऐसी आवाज की पतंग हैं जो उड़ी,तो उड़ी, और ऐसी उड़ी कि न कोई काट सका और न कोई पकड़ सका ! यह तो मेरा सौभाग्य है कि आज मैं आशा जी के बारे में कुछ शब्द लिख सका !
मैं आपका आभारी हूँ पीयूष जी, और आशा जी का आभारी तो हमेशा रहा हूँ ! और आपको आपकी नई किताब ‘‘मन पतंग सा’’ जो गीत संग्रह है, को अप्रतिम सुप्रसिद्धि मिले !
उत्तम सिंह
प्रख्यात संगीतकार, संगीतज्ञ एवं प्रसिद्ध वाइलिन वादक

20 वर्षों की दोस्ती, आत्मीयता की निरंतरता में एक और अध्याय
अद्भुत आशीर्वाद
श्री उत्तम सिंह, प्रख्यात संगीतकार, संगीतज्ञ एवं प्रसिद्ध वाइलिन वादक की दुनिया के एक ऐसे चमकते सितारे हैँ, जिनके संगीत की धुनें आज भी कर्णप्रिय हैँ, जिनकी खुशबू आज भी दुनिया के जहन में ताजगी का अहसास कराती है, अपनी संगीत यात्रा इलैय्या राजा के साथ शुरू कर वे निरंतर गतिशील रहे, एस. डी. बर्मन, आर. डी. बर्मन के साथ-साथ बहुत से संगीतकारों के साथ उनका सफर जारी रहा, आज भी उनके वायलिन की धुन फिल्मी दुनिया के हजारों गीतों में नजर आयेगी! उनके अपने निर्देशन में बनी तमाम पंजाबी फिल्मों के गीतों ने भी खूब प्रसंशा पाई, तों वहीं तमाम हिन्दी फिल्मों ‘‘दिल तों पागल है, गदर-एक प्रेम कथा, के गीतों ने उन्हें फिल्मफेयर और जी सिने अवार्ड से नवाजा तों महेश भट्ट की फिल्म ‘‘दुश्मन’’ का गीत ‘‘चिट्ठी न कोई संदेश —आज भी लोकप्रिय है! और ‘‘पिंजर’’, ‘‘बागबाँ’’ आदि उल्लेखनीय फिल्में है,
श्री उत्तम जी एक श्रेष्ठ संगीतकार ही नहीं एक सहृदय, मिलनसार और रिश्तों को निभाने वाले इंसान के रूप में भी सुविख्यात हैँ!

गीतकार: पीयूष अवस्थी

समीक्षक: उत्तम सिंह
(प्रख्यात फिल्म संगीत निर्देशक, मुम्बई)