नुसरत अतीक गोरखपुरी की ग़ज़लें
नुसरत अतीक गोरखपुरी की ग़ज़लें
नुसरत जहाँ
क़लमी नाम....नुसरत अतीक़ गोरखपुरी
ग़ज़ल
हज़ार ग़म सहे बस तेरी इक हंसी के लिए
तू ख़ुश रहे यही काफ़ी है ज़िन्दगी के लिए
सुबूत अपनी मुहब्बत का और क्या देते
कि ख़ुद को भूल गए हम तेरी ख़ुशी के लिए
अजीब दर्द भरा है ये ज़िंदगी का सफ़र
कहीं सुकूं नहीं मिलता है दो घड़ी के लिए
पता चला कि वोही मेरी जां का दुश्मन है
मैं जां लुटाती रही जिसपे दोस्ती के लिए
कभी जलाए थे जिस घर में उलफ़तों के चराग़
तड़प रही हूँ उसी घर में रोशनी के लिए
लिखा नहीं था जो हाथों की इन लकीरों में
तमाम उम्र तरसते रहे उसी के लिए
मैं छोड़ आई हूँ पीछे वो रास्ता नुसरत
तड़प ये कैसी है फिर भी उसी गली के लिए
ग़ज़ल
कोई घाटा नहीं है दुश्मनी में
बहुत लूटे गये हैं दोस्ती में
ज़बरदस्ती का हंसना और हंसाना
अदाकारी बहुत है ज़िन्दगी में
अंधेरे में बहुत महफूज़ थे हम
बहुत पछताए आकर रौशनी में
घुटन अंदर की आ जाती है बाहर
मज़ा आता है मुझको शायरी में
सियासत की दुकां खोलूंगी मै भी
नहीं रखा है कुछ इस नौकरी में
मुकम्मल कोई भी मिलता नहीं है
कमी है थोड़ी- ज़्यादा हर किसी में
वही सच्चा है रिश्ते दार अपना
जो साथी है मेरे ग़म और खुशी में
लगा जनमो का रिश्ता है हमारा
है अपनापन बहुत इक अजनबी में
समझ पाना बहुत मुश्किल है नुसरत
कयी चेहरे छुपे हैं आदमी में
नुसरत जहाँ
क़लमी नाम….नुसरत अतीक़ गोरखपुरी
जन्म…..22 मार्च 1975, गोरखपुर उत्तर प्रदेश
शिक्षा….एम०ए, मोअल्लिम, बी०टी०सी बी एड
नौकरी….सरकारी बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापिका|
प्रकाशित पुस्तकें…
*”*एहसास की अमर बेल*
*, उर्दू हिंदी दोनो भाषाओं में। तीसरा काव्य संग्रह”*सुलगते एहसास”* चौथा काव्य संग्रह”*एहसास का दर्पण”*
हिंदी, उर्दू दोनों भाषाओं में पांचवा संग्रह प्रकाशनार्थ
सम्मान…7 दर्जन से अधिक सम्मान|
विगत 22 वर्षों से रचनाएँ लिख रही हैं|
8 वर्षों से देश विदेश के बड़े मुशायरों एवं कविसम्मेलनों में भाग ले रही हैं|
सम्मान… बेस्ट टीचर एवार्ड
आज़मी कैंपस, मीनू बाबू का हाता, तुर्कमानपुर, गोरखपुर, 273005 UP
Phone: 9305326866, Email… hindustanalmirahgkp@gmail.com