पीयूष अवस्थी का गीत

पीयूष अवस्थी का गीत

पीयूष अवस्थी

यह प्यार का पहला आलिंगन
—–

खुशियाँ करती हैं आवर्तन,
साँसें करती हैं अभिनन्दन,
यह प्यार का पहला आलिंगन !

दिख रही चाँदनी बलखाई,
नापे है तल की गहराई,
फिर चाँद ने अमृत बरसाया,
नस – नस में बजती शहनाई,

जीवन का मोहक परिवर्तन,
हो गया तरुण कोई बचपन,
यह प्यार का पहला आलिंगन !

खुशियों से भीग गईं अँखियाँ,
दर्पण से होती हैं बतियाँ,
मन हिरनी जैसा दौड़ रहा,
कर गईं ठिठोली फिर सखियाँ,

वो मेरा , मैं उसका दरपन,
प्राणों में प्राणों का अरपन,
यह प्यार का पहला आलिंगन !

दिल में है सपनों की दुनिया,
अपनों में अपनों की दुनिया,
कुछ हार गये, कुछ जीत गये,
वचनों में वचनों की दुनिया,

जिसको अर्पित मेरा तन- मन,
वो माथे का कुमकुम चन्दन,
यह प्यार का पहला आलिंगन !

नूपुर बजते मेरे आँगन,
घर महके जैसे नन्दनवन,
तन – मन में सिहरन व्याप गई,
बनकर पंछी उड़ता जीवन,

धड़कन को छूती है धड़कन,
पग -पग में नाच रही थिरकन,
यह प्यार का पहला आलिंगन !

मोहन की बजती बाँसुरिया,
चटकी माखन की गागरिया,
हम रूठ गये झूठी – मूठी,
आ गये मनाने साँवरिया ,

फिर उमड़ – घुमड़ आया सावन,
मन में उपजा है वृन्दावन ,
यह प्यार का पहला आलिंगन !!

पीयूष अवस्थी

मुख्य संपादक

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *