प्रेम: जीवन की अनमोल शक्ति – मेघा राठी
प्रेम: जीवन की अनमोल शक्ति
– मेघा राठी
प्रेम, जीवन की सबसे सुंदर और सशक्त भावना है। फ़्योदोर दोस्तोयेव्स्की के शब्दों में, ‘‘‘प्रेम करने में असमर्थ हो जाना ही नर्क है।’’ प्रेम की इस अद्भुत शक्ति से वंचित होना एक ऐसा अनुभव है, मानो जीवन के स्रोत से कट जाना। यह वही स्थिति है, जैसे तपती रेत पर खड़ा व्यक्ति, जिसके सामने शीतल नदी बह रही हो, लेकिन वह उसमें उतरने में असमर्थ हो। हम सबके जीवन में ऐसे क्षण आते हैं, जब हम प्रेम से दूर हो जाते हैं या उसे महसूस नहीं कर पाते। लेकिन क्या इसका यह अर्थ है कि हम हार मान लें?
बिलकुल नहीं। प्रेम वह शक्ति है जो हमें जीवन की हर कठिनाई को पार करने की प्रेरणा देती है। प्रेम रहित हृदय जीवन की सुंदरता को महसूस करने में असमर्थ हो सकता है, लेकिन इसे पुनः जाग्रत किया जा सकता है। प्रेम कभी समाप्त नहीं होता, बस हमें उसे पुनः पाने का प्रयास करना होता है। अगर आपके हृदय में प्रेम का स्रोत अवरुद्ध हो गया है, तो यह समय है उस चट्टान को हटाने का, जो आपके रास्ते में बाधा बनी हुई है।
अपने आप को प्रेम से वंचित न रखें। जब आप अपने जीवन में प्रेम को पुनः आमंत्रित करते हैं, तो दुनिया की हर छोटी चीज़ में सुंदरता दिखाई देने लगती है। चाहे वह किसी बालक की हँसी हो या प्रकृति के दृश्य, हर चीज़ आपके लिए एक नया अर्थ रखती है। प्रेम से भरा हुआ हृदय न सिर्फ आपके जीवन को समृद्ध करता है, बल्कि आपके आसपास की दुनिया को भी रोशन करता है।
इसलिए, प्रेम को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानें। यदि आपने उसे खो दिया है, तो उसे फिर से पाने के लिए प्रयास करें। प्रेम वह शक्ति है जो आपके जीवन को अर्थ देती है, और जीवन को सुंदर बनाती है। याद रखें, प्रेम से वंचित व्यक्ति केवल अपने लिए ही नहीं, बल्कि पूरे संसार के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन सकता है, जब वह प्रेम को फिर से अपना लेता है।
तो हृदय से कहें, ‘प्रेम, तुम हृदय से रूठ कर मत जाना।’
– मेघा राठी
उप संपादक’‘शब्दकार पत्रिका’’
संप्रति: लेखिका उपन्यासकार, अमर उजाला, दैनिक जागरण, जनसत्ता, पंजाब केसरी, वनिता,
जागरण सखी, दिल्ली प्रेस की पत्रिकाएं, नूतन कहानियां आदि विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में नियमित प्रकाशित