प्रेम प्रकाश “प्रेम ” की ग़ज़ल

प्रेम प्रकाश "प्रेम " की ग़ज़ल

- प्रेम प्रकाश "प्रेम"

खुल कर कह दे, मन में क्या है ?
सच कह दे, उलझन में क्या है ?

मौसम है तो फूल खिले हैं,
वरना इस उपवन में क्या है ?

व्यक्ति नहीं, गुण पूजे जाते,
हाड़-मांस के तन में क्या है ?

मंहगाई में गुण सुरसा का,
छोटे से वेतन में क्या है ?

“प्रेम”नहीं जिस के जीवन में,
फिर उस के जीवन में क्या है ?

– प्रेम प्रकाश “प्रेम”

“शांति कुन्ज” वार्ड नम्बर 05

कुरवाई, जिला विदिशा (MP) 464-224

Mob. : 9713331450, 8770911108

E-mail : choubey.prem123@gmail.com

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