रिटर्न गिफ्ट
कथा- कहानी
रिटर्न गिफ्ट
मीता लुनिवाल "मीत"
सोनू और आरव बहुत अच्छे दोस्त थे वो दोनों साथ पढ़ते थे दोनों ही पढ़ाई में अच्छे थे पर आरव एक खानदानी रईस का लड़का था जिसे किसी प्रकार की कोई कमी नहीं थी जबकि सोनू एक मेडिकल की दुकान में काम करने वाले प्रकाश का बेटा था जो की सामान्य घर से था।
सोनू आरव एक छोटे से गांव में रहते थे जहां बस एक ही मेडिकल की दुकान थी जिस पर प्रकाश काम करता था और एक छोटा सा हॉस्पिटल जिसमे भी एक ही डॉक्टर रहता था छोटा सा बड़ा सुंदर सा गांव था ज्यादा जनसंख्या भी नहीं थी ज्यादा पढ़े-लिखे लोग भी नहीं रहते थे पर वह सब चाहते थे कि उनके बच्चे बहुत पढ़े।
एक बार आरव का जन्मदिन था उसके माता-पिता ने बहुत बड़ी पार्टी रखी थी आरव ने अपने स्कूल के सभी दोस्तों को बुलाया था और सोनू को भी , सोनू यही सोचता रहा कि आरव को जन्मदिन का क्या तोहफा दिया जाए बहुत सोचने के बाद आरव ने अपने माता-पिता से बात करी वह दोनों भी सोचने लगे तभी आरव की मां बोली की बेटा मैंने यह स्वेटर तुम्हारे लिए बनाया है आज ही बनकर तैयार हुआ है पर यह तुम अपने दोस्त आरव को दोगे तो उसे अच्छा लगेगा प्रकाश और सोनू यह सुनकर खुश हो गए और सोनू ने कहा हां मां यही अच्छा रहेगा यह स्वेटर बहुत सुंदर भी है कल आरव आया था जब आप स्वेटर बना रही थी तो उस को ये पसंद भी आया था।
वैसे प्रकाश इतना कमा लेता था कि वह खुद की और अपनी पत्नी का और अपने बच्चों की देखभाल कर सके पर उसके माता-पिता की जिम्मेदारी भी प्रकाश के ऊपर ही थी और उसके माताजी ज्यादा बीमार रहती थी उसकी दवाइयां का खर्चा बहुत ज्यादा था इलाज भी शहर में कराना पड़ता था। जिससे उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी।
आरव का जन्मदिन बहुत ही धूमधाम से मनाया गया स्कूल के सभी शिक्षक प्रधानाचार्य और स्कूल के काफी सारे बच्चे और गांव के बहुत से लोग शामिल हुए थे बहुत धूमधाम से देर रात तक पार्टी चली और जन्मदिन अच्छा मनाया गया सब ने बहुत बड़े-बड़े अच्छे-अच्छे तोफे दिए सोनू भी स्वेटर लेकर गया था फिर आरव ने सबको रिटर्न गिफ्ट के रूप में सब बच्चों को रिमोट वाली कार दी जो की काफी महंगी थी रिटर्न गिफ्ट मिलने पर सभी बच्चे बहुत खुश हो गए । जब पार्टी खत्म हो गई सभी अपने-अपने घर चले गए तब आरव अपने माता-पिता दादा दादी के साथ मिलकर गिफ्ट देखने की जिद्द करने लगा सब ने एक-एक करके बहुत से गिफ्ट देखे अच्छे-अच्छे गिफ्ट आए थे जब सोनू का गिफ्ट आया तो खोलते ही आरव बहुत खुश हुआ इतना सुंदर स्वेटर यह तो मुझे बहुत पसंद था आरव ने झट से वह स्वेटर पहन कर सबको दिखाया उसकी मां दादी और दादाजी भी खुश हुए पर उसके पिताजी को पसंद नहीं आया वह वैसे भी आरव और सोनू की दोस्ती से खुश नहीं थे वह आरव को हमेशा समझाते थे कि बराबर के लोगों से दोस्ती रखो पर वह सुनता ही नहीं था उसे सोनू की दोस्ती बहुत पसंद थी।
कुछ समय बाद सोनू का भी जन्मदिन आया उसने भी अपने दो चार दोस्तों को बुलाकर एक छोटी सी पार्टी रखी सब ने गिफ्ट दिए और आरव ने तो उसे बहुत सारे गिफ्ट दिए जिसे वह अपनी मां के साथ बाजार से लेकर आया था जिन्हे प्रकाश लेना भी नहीं चाहता था पर आरव नहीं माना सोनू ने सबको रिटर्न गिफ्ट में छोटे-छोटे गमले में छोटे-छोटे पौधे बांटे क्योंकि उसके दादाजी की एक छोटी सी नर्सरी थी जिसमें पौधे तैयार करते थे पार्टी खत्म हुई सब अपने घर चले गए आरव जब घर पहुंचा तो पिताजी ने कहा की रिटर्न गिफ्ट क्या दिया तो आरव ने कहा एक पौधा दिया है छोटे से गमले में जिसे मैं अपने गार्डन में लगाऊंगा आरव के पिता हंसने लगे की कोई पौधा भी दिया जाता है कंजूस कहकर अपने कमरे में चले गए। पर आरव बहुत खुश था उसने दूसरे दिन सुबह उठते ही माली के साथ उस पौधे को अपने बगीचे में लगाया माली ने बताया यह आम का पेड़ है और बहुत अच्छी किस्म का लगता है सोनू के दादाजी बहुत अच्छे पौधे तैयार करते हैं उनके तैयार हुए पौधे में अच्छे फल फूल आते हैं यह माली काका ने आरव को बताया।
एक समय गांव के सरपंच की बेटी की शादी थी जिसमें गांव के बहुत से लोग पास के शहर में जहां सरपंच ने शादी रखी थी वहां गए हुए थे उसमें आरव के माता-पिता भी गए थे पर आरव की परीक्षाएं होने के कारण वो नहीं गया था और ना ही सोनू के घर से कोई गया था क्योंकि सोनू की दादी की तबीयत भी ठीक नहीं थी इसलिए कोई भी नहीं गया।
करीब रात के 12:00 बजे आरव अपने एक नौकर के साथ सोनू के घर आया और कहा मेरे दादाजी की तबीयत बहुत खराब है और डॉक्टर साहब भी यहां नहीं है शादी में गए हैं पापा मम्मी भी नहीं है आसपास कोई भी नहीं है तब प्रकाश अपना बैग लेकर आरव के घर गया जिसमें वह कुछ इंजेक्शन दवाइयां वगैरह सब रखता था वह गया उसने दादाजी का चेकअप किया उन्हें दवाइयां देकर उन्हें अस्थमा अटैक आया था उनके इंजेक्शन वगैरा लगाए पूरी रात वहीं रहा सोनू भी उनके साथ था सोनू आरव भी वहीं बैठे रहे।
सुबह जब आरव के माता-पिता आए उन्हें सारी जानकारी हुई तब डॉक्टर साहब भी साथ में आए थे क्योंकि नौकर ने शहर में उन्हें फोन कर दिया था डॉक्टर ने आकर दादाजी को देखा और प्रकाश से बात की क्या-क्या दवाइयां दी है फिर डॉक्टर ने आरव के पिताजी को बताया की आपके पिताजी अब बिल्कुल ठीक है अगर समय पर प्रकाश आकर उन्हें नहीं देखता तो कुछ भी हो सकता था प्रकाश एक बहुत समझदार और अच्छी जानकारी रखने वाला इंसान है अब के पिताजी ने हाथ जोड़कर प्रकाश का शुक्रिया किया उनकी आंखें भर आई थी और उनसे माफी भी मांगी आप इतने अच्छे इंसान हैं और मैं आपको हमेशा नीचा दिखाता रहा। अब उसे सोनू और आरव की दोस्ती पर कोई आपत्ति नहीं थी वो समझ गए थे कि इंसान पैसों से छोटा बड़ा नहीं होता है।
समय बदला आरव और सोनू बड़े हो गए और आरव का लगाया हुआ रिटर्न गिफ्ट आम का पौधा भी बड़ा हो गया और उसमें आम लगने लग गए थे सोनू और आरव आम खाते और गुठलियों भी लगा देते थे धीरे-धीरे बहुत सारे आम के पौधे हो गए जब दोनो बड़े हो गए तो उसने आम को अपना व्यापार बना लिया उसके बहुत सारे पौधे हो गए थे अब सोनू और आरव दोनों मिलकर आम का ही कारोबार करते थे अब आरव ने सोनू को अपना पार्टनर बना लिया था आज आरव के पिताजी कहते थे यह होता है रिटर्न गिफ्ट मैं तो इसे मामूली समझता था पर यह तो बहुत बड़ा रिटर्न गिफ्ट मिला।
– मीता लुनिवाल “मीत“
जयपुर, राजस्थान