रिश्ते – अम्बिका कुशवाहा

Ambika Kushwaha

रिश्ते

– अम्बिका कुशवाहा

गुप्ता जी बड़ी देर से बालकनी में टहल रहे थे। काफी चिंतित दिख रहे थे और बार बार मेन गेट की ओर देखे जा रहे थे। 

तभी उनकी पत्नी साधना जी चाय लेकर आती है और कहती है ’क्यों इतना परेशान हो रहे हो? थोड़ी देर कुर्सी पर बैठ भी जाओ। गुप्ता जी ने एक गहरी सांस ली और वही कुर्सी पर बैठ चाय पीने लगे।

गुप्ता जी की चिंता का कारण उनकी बेटी पायल जो आज ही अपने ससुराल से आ रही है। गुप्ता जी का छोटा बेटा उसे लाने गया है। 

तभी मेन गेट खुलता है गुप्ता जी की बेटी पायल अपने भाई स्वराज के साथ घर में आती है। गुप्ता जी और उनकी पत्नी बेटी का हाल चाल लेते है उसके तुरंत बाद पायल अपने पुराने कमरे में चली जाती है। गुप्ता जी पत्नी बेटी के लिए खाना बनाने को कह किचन में चली जाती है। 

गुप्ता जी फिर से कुर्सी पर बैठ गहरी सोच में डूब जाते है। 

गुप्ता जी ने अपनी बेटी पायल को काफी पढ़ाया लिखाया था पायल एक सॉफ्टवेयर कंपनी में जॉब भी करती थी। गुप्ता जी ने बेटी का विवाह एक प्रतिष्ठित परिवार में किया था। पायल का पति एक अच्छे पद पर कार्यरत है। लेकिन शादी के कुछ दिनों बाद ही पायल ने अपनी नौकरी छोड़ दी। लेकिन क्यू?? ये पायल ने अपने मां बाप को बताया नही। जब हदें पार कर गई, पायल का पति उसे अनेक तरह से प्रताड़ित करने लगा तब पायल ने अलग होने का फैसला लिया। और मां पापा को बताया की वो वापस आ रही है। बेटी के रिश्तों को बचाने के लिए मां बाप ने भी काफी कोशिश की लेकिन कोई हल नहीं निकला। पायल पूरी तरह टूट चुकी थी। स्त्रियां जो होती है वो अंत तक कोशिश करती है रिश्तों को बचाने की। रिश्ते महज उनके लिए रिश्ते नही बल्कि उनकी भावनाओं के साथ एक जुड़ाव होता है। अलग होने के फैसला बहुत कठिन होता है लेकिन जब रिश्तों की बुनियाद खत्म हो जाती है तब कुछ बचाने को बचा नही होता है। और उस रिश्ते से बाहर निकल जाना ही एक रास्ता बचा होता है। 

गुप्ता जी और उनकी पत्नी भी बेटी की तकलीफों के आगे बेबस थे। फिर भी बेटी को हौसला देने को खड़े है। समाज ऐसा है की लड़कों का अतीत महज एक कहानी होती है लेकिन लड़कियों का अतीत कलंक बन जाता है। 

गुप्ता जी कुर्सी से उठकर बेटी के कमरे की ओर गए साथ में उनकी पत्नी भी पीछे से नाश्ता लेकर गई। 

उधर पायल अपने कमरे की खिड़की से सटकर बाहर बगीचे की ओर देख रही है। मम्मी पापा के आते ही पायल का ध्यान टूटा और गुप्ता जी बेटी के साथ बैठ उसका हौसला बढ़ाने लगे, ताकि वो एक खराब किस्से को भूल अपने पैरों पर फिर से खड़ी हो सके। और फिर से अपने जीवन की नई दिशा की ओर बढ़ सके।

– अम्बिका कुमारी कुशवाहा 

पटना (बिहार)

ई-मेल : kumariambika78@gmail.com

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