शैलेन्द्र शर्मा के गीत

शैलेन्द्र शर्मा के गीत

शैलेन्द्र शर्मा

करते वारे-न्यारे

आंखें अपनी ढ़की गईं हैं
बड़े जतन से प्यारे

हम कोल्हू के बैल रहे
समझ न पाये चालें
इसीलिए वे बीच बीच में
रह-रह शब्द उछालें

यों ही रहें लगाते चक्कर
हम कितने बेचारे

कब रुकना है, कब चलना है
वे हमें बताते हैं
झूठ-मूठ के सपनों में हमको
रोज फॅंसाते हैं

सूखा चाहे बाढ़ कहीं हो
करते वारे-न्यारे

लोक हमारा, तंत्र उन्ही का
अच्छा युग्म बना है
टपक रहे गुम्बद के ऊपर
‘पालीथीन’ तना है

जन-गण-मन पर आरोपित
वे जगमग चांद-सितारे

बदला कहाँ जमीर

स्यापा करने से बोलो क्या
बदलेगी तस्वीर

महावीर-गौतम-गुरुनानक
दादू और कबीर
दे-देकर उपदेश थक गये
कितने संत-फकीर

पूज-पूज मूर्तियाँ सभी की
पीटी मात्र लकीर

चोले बदल बदल कर देखे
जाने कितनी बार
अंतर्मन तो दुर्गंधित है
बाहर इत्र फुहार

चेहरे पर कितने ही चेहरे
बदला कहाँ जमीर

एकरूपता दिखे नहीं, पर-
समरसता की बात
घनी अंधेरी रातें फिर भी
कहते स्वर्ण प्रभात

नाम बदल देने से बोलो
कब बदली तस्वीर

शैलेन्द्र शर्मा

सम्प्रति: भारतीय रिज़र्व बैंक से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के पश्चात् स्वाध्याय एवं लेखन में सक्रिय
विधाएँ: गीत- नवगीत, ग़ज़ल, दोहे, दुमदार दोहे, कुण्डलियाँ, मुक्तक, अतुकांत रचनाएँ, साहित्यिक/सामाजिक आलेख एवं यात्रा संस्मरण आदि.
स्थायी पता: 248/12, शास्त्री नगर, कानपुर- 208005
सचलभाष: 6387100753/9336818330

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