समाप्त कुछ नहीं होता – दीप प्रकाश गुप्ता

Deep Prakash Gupta_Samastipur Bihar

समाप्त कुछ नहीं होता

दीप प्रकाश गुप्ता

कभी ऐसा लगता है जैसे सब कुछ खत्म हो जाएगा अब क्या बचेगा शायद कुछ भी नहीं…कभी ऐसा ख्याल आए तो पीछे मुड़ के इतिहास देखना…

राम का राजतिलक होने वाला है जनता खुश है…अचानक से खबर आती है राम का राजतिलक नहीं होगा…जनता मायूस हो गई..सबने सोच लिया था राम या तो बनवासी रहेंगे या फिर वैरागी बन जाएंगे…अब राज्य में वो रौनक नहीं होगी..सब उदास थे…वक्त ने करवट ली राम वापस आए….राम का राजतिलक हुआ…राम राज्य संसार का सबसे बेहतरीन शासन माना गया।

देश गुलाम था आजादी की लड़ाई लड़ी जा रही थी  क्रांतिकारियों को हर बार जनता के एक ही सवाल से जूझना पड़ता था…”आखिर कब तक..कब तक सहन करें हम कब तक लड़े हम…किसी चीज की सीमा होती है कुछ नहीं हो सकता..देश गुलाम रहेगा” क्रांतिकारी कहते थे धैर्य रखो…हम होंगे कामयाब एक दिन…जनता कहती थी ये गीत आप ही गाओ कुछ नहीं होने वाला कुछ नहीं होगा…आखिर कब होगा?कुछ नहीं होगा…

वक्त ने करवट ली देश आज़ाद हो गया….

जापान पर परमाणु हमला हुआ…जब पहली बार ऐसा हुआ और फिर दूसरी बार ऐसा हुआ तो सबने सोच लिया था अब कुछ नहीं हो सकता।”अब सब खत्म हो जाएगा कोई नहीं बचेगा,परमाणु दुनिया खत्म कर देगा”

वक्त ने करवट ली जापान संभाल गया फिर से खड़ा हुआ आज विकसित देश की श्रेणी में आता है।

सदी की सबसे बड़ी त्रासदी पूरी दुनिया ने साल 2021 में देखी ऐसा लग रहा था जैसे अब कुछ भी सामान्य नहीं हो सकेगा…शायद अब इसी तरह जीना होगा…वो आजादी जो पहले थी अब नहीं रहेगी..

वक्त ने करवट ली सब कुछ सामान्य हो गया।

ऐसी कई घटनाओं को दुनिया ने देखा है लोगों ने देखा है।आंख बंद करो इतिहास की घटनाओं को याद करो..वो विभत्स स्थिति की कल्पना में खोकर देखो…बंद आंखों में कल्पना करते वक्त यही महसूस होगा कि कुछ भी ठीक नहीं होगा..

फिर आंखें खोलो तुम्हारे समाने सामान्य दुनिया मिलेगी एक दुनिया जो तुमने आंख बंद करके देखी थी वो विभत्स रूप देखा था और एक ये दुनिया जो आंखों के सामने है।

तुम चौंक जाओगे….तुम  भावुक हो जाओगे….

फिर तुम्हें अंतर्मन से ये आवाज आयेगी जो कह रही होगी…

“तुम्हें क्या लगता है मैं नहीं हूं?

“मैं था,मैं हूं और मैं ही रहूंगा”

कभी कुछ भी खत्म नहीं होता..कुछ न कुछ बचा रह जाता है…कभी सब कुछ भयावह लगता है और फिर सब कुछ सामान्य हो जाता है।

– दीप प्रकाश गुप्ता

लेखक, विचारक

समस्तीपुर, बिहार

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