संसद का रोमांचक 20-20 क्रिकेट

संसद का रोमांचक 20-20 क्रिकेट

पीयूष अवस्थी

संसद का रोमांचक 20-20 क्रिकेट

कानों से देखा ,आँखों से सुना
मैच का हाल जानिये

बड़े ही रोमांचक मुकाबले में भारत ने ICC T-20 विश्वकप में दक्षिण अफ्रीका को हराकर विश्वकप 2024 का ख़िताब दूसरी बार जीता ! भारत को इस ट्रॉफी को जीतने के लिए 13 साल इंतज़ार करना पड़ा !

इससे भी अधिक रोमांचक मुकाबला 20-20 की तरह संसद में भी चल रहा है ! जिस प्रकार उपरोक्त T 20-20 में अंतिम क्षणों तक लोगों की साँसे ऊपर नीचे भागती रहीं , यह खेल तो उससे भी ज़्यादा रोमांचक मोड़ पर खड़ा है ,यहाँ इस खेल के अलग नियम क़ायदे हैं , ये कुछ -कुछ IPL मैचों की तरह है,जिसमें तय नहीं किस देश, प्रदेश का खिलाड़ी किस टीम की तरफ से खेलेगा ! दोनों टीमों को 272-272 खिलाड़ी चाहिए ,और जो जितने ज़्यादा खिलाड़ी रखना चाहे रख सकता है ,दोनों टीमों को मिलाकर कुल खिलाड़ी 545 से अधिक नहीं होंगे !

हर खिलाड़ी की बोली लगाई जाएगी ,कुछ खिलाड़ी टीम के स्थायी हैं जिनकी बोली नहीं लगाई जा सकती ,जो जितनी अधिक बोली लगाकर जिस खिलाड़ी को चाहे ,अपनी टीम में शामिल कर सकता है ! G-20 सम्मेलन की तरह ही इसकी तैयारी महीनों से चल रही थी ,लेकिन समय कहाँ रुकता है ,आखिर आ ही गया , दो खेमों में खिलाड़ी बंटे हुये हैं ! दो टीमें बनाई जा चुकी हैं , एक टीम नाडी है ( ना देबे) दूसरी टीम इंडो है (अन्दर घुसेंगे) !

स्टेडियम भी खचाखच भरा हुआ है ,करीब 80 करोड़ लोग स्टेडियम में मौजूद हैं ,बाकी 60 करोड़ टीवी पर मैच देख रहे हैं , और विदेशों के कम से कम 200 करोड़ लोग इस मैच पर अपनी निगाहें लगाए हुए हैं , दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक मैच ! स्टेडियम दर्शक दीर्घा से ज़ोर-ज़ोर इंडो -इंडो के नारे गूंज रहे हैं तो कहीं नाडी-नाडी की आवाज़ें सुनाई पड़ रही हैं !

इस महान मैच के अपने नियम हैं , जिस टीम में दूसरी टीम से 1 भी सदस्य ज़्यादा होगा उसकी पहचान सिक्के में ‘हेड’ की मानी जायेगी और दूसरी रनर टीम की पहचान ‘टेल’ की मानी जायेगी ! यानी यहाँ भी चित -पट का खेल खेला जाएगा !

अब मैदान में दोनों टीमों के खिलाड़ियों का जमावड़ा लग गया है ,गिनती की जा रही है ,एक टीम की गिनती की गई , 240 खिलाड़ी निकले ,दूसरे की गिनती हुई 234 निकले ! दोनों अंपायरों ने एक दूसरे को देखा ,अलग जाकर मशविरा किया, इन दोनों ही टीमों के खिलाड़ी तो पूरे नहीं है ,उन्होंने बड़े हुज़ूर को फोन लगाया ,सिर्फ इतना सुनाई पड़ रहा था जी-जी सर ,जैसा हुकुम !

अंपायरों ने 240 खिलाड़ियों वाली टीम के कप्तान से पूछा ,ये तो 240 हैं बाकी कहाँ है ? कप्तान रौबदार आवाज़ में बोला – आपको तो पता है अभी बोली चल रही है , हमारा उपकप्तान वहीं है ,बाकी भी पूरे हो जायेंगे ! अंपायरों ने कुश्ती रेफरी की तरह उस कप्तान का हाथ ऊपर उठा दिया , फिलहाल विजयी कप्तान मुस्कुराये तो दूसरे पक्ष की टीम भी खिलखिलाकर हँस दी, विपक्षी टीम के हंसने पर यह कप्तान कुछ सकपका गया ! उसने खुद को संभाला और तुरंत जेब से सिक्का निकालकर हवा में उछाल दिया ,सब आसमान की तरफ देखने लगे , हेड-हेड,टेल-टेल की आवाजें हवा में तैर गईं , सिक्का नीचे गिरा ‘ हेड’ दिखाई पड़ा ,वह कप्तान हेड-हेड बोलते हुए तेजी से झुका और सिक्का उठाकर तुरन्त जेब में डाल लिया ,क्योंकि उसे पता था कि सिक्के के दोनों तरफ ‘हेड’ ही बना है ,’टेल ‘ है ही नहीं, इसे कप्तान ने ऐसे ही मौकों के लिए पहले से ढलवा कर रखा था, दोनों तरीकों के सिक्के जेब में , यानी चित भी मेरी पट भी मेरी, टैइयाँ——! जैसा कि फ़िल्म ‘शोले’ में सिक्का ‘जय’ के पास था !

अव टीवी ,मीडिया एंकरों का मैदान में प्रवेश होता है ,जीतने वाले कप्तान की तरफ तमाम माइक घूम जाते हैं ” सर-सर ,किसी के प्रश्न पुछने के पहले ही कप्तान बोल उठा -अब सर-सर क्या ? टास हम जीते हैं पहले हमीं बैटिंग करेंगे ! अंपायर भी हमारे होंगे,रेफरी तो पहले से हमारा है !

अब दूसरी टीम।से काफी शोर मचने लगा ,नहीं अंपायर हमारा होगा ,या फिर चुनाव होगा ,स्टेडियम से भी आवाज़ें आने लगीं ” इंडो- इंडो” “गो अहेड-गो अहेड, ! टॉस जीतने वाले कप्तान के माथे पर बल पड़ गए , दोनों टीमें अलग – अलग मशविरे में लग गईं ,रणनीति यही बनी कि चुनाव से तय होगा , टॉस जीतने वाली टीम ने अपना एक खिलाड़ी दूसरी टीम के कप्तान को राजी करने भेजा, तमाम मशविरे के बाद निष्कर्ष यही था कि इस बार हमारा कप्तान बन जाने दो ,दूसरी पाली में जब तुम्हारा समय आये तो तुम्हारा कप्तान होगा , ये मेरी जिम्मेदारी है ,बस औपचारिकता करनी है , दूसरी टीम राज़ी हो गई ,अब जो मध्यस्तता करने आया था वो एक सीनियर खिलाड़ी था ,और विपक्षी टीम से उसके सम्बन्ध भी अच्छे थे ! स्टेडियम से व पैवेलियन से शोर मचता रहा लेकिन वही हुआ जो विजेता टीम का कप्तान चाहता था ,उसने फिर वही दोनों तरफ हेड वाला सिक्का उछाला , ‘हेड’ ही आना था ‘हेड’ ही आया !

दोनों टीमें अपने-अपने ड्रेसिंग रूम में चली गईं,किसको किस प्रकार आउट करना है, किसको किस प्रकार शॉट लगाने हैं ,कौन कमजोर खिलाड़ी है कैसे आउट हो सकता है ,कौन फ्री हीटर है ,जिसको संभल कर बाल फेंकनी है ,कैसे अंपायर को इशारा देना है , इस गेम के नियम भी अजब-गजब हैं ,इनमें सभी गेमों के नियमों को जोड़कर अलग नियम बनाये गए हैं , हाकी, फुटबॉल, क्रिकेट, बालीबाल, खो-खो, मलखम्ब, वाद-विवाद प्रतियोगिता , कबड्डी,कुश्ती , और एक खेल जो काफी समय से जुड़ा है जूतमपैजार,कुछ और फेंका-फेंकी ,धक्का-मुक्की आदि ,इसमें अंपायर के पास लाल,पीला, नीला सभी प्रकार के कार्ड हैं ,वो जब चाहे जितने खिलाड़ियों को मैदान से बाहर कर सकता है !

खेल शुरू होने का अलार्म बज गया था,दोनों टीमों के खिलाड़ी मैदान पर उतरने लगे थे, जिन्हें बैटिंग करनी थी, वो मैदान में आगे थे ,बाकी पैवेलियन में बैठे थे ,इसी तरह फील्डिंग करने वाले खिलाड़ी भी मैदान में उतर आये, उनके बाकी के साथी भी पैवेलियन में बैठ गए, अब वे खिलाड़ी भी पैवेलियन में बैठ गये थे जिनकी बोली नहीं लग पाई थी ,कुछ नदारत भी दिखाई पड़ रहे थे !

अब मैदान पर मैच के मुख्य रेफरी का आगमन हुआ, सभी खिलाड़ियों ने खड़े होकर उनका स्वागत किया ,उन्होंने सभी को सम्बोधित किया ,विजयी टीम द्वारा लिखा गया भाषण पढ़कर अपनी औपचारिकता पूरी की,और शुरू हो गया राष्ट्रगान, इसी बीच अंपायर को लगा वो पीछे खड़ा रह गया है उसकी फोटो नहीं आएगी ,तो वो राष्ट्रगान के बीच में ही चलकर आगे आकर खड़ा हो गया ,देखा सबने, लेकिन विपक्षी टीम ने उसे घूरकर देखा !

खैर ! राष्ट्रगान भी समाप्त हो गया ! मुख्य रेफरी ने विदाई ली ! अब परम्परानुसार सबका शपथ ग्रहण भी होना जरूरी था ,एक-एक कर नाम आते गये सभी ने ईश्वर की शपथ ली “कि ईमानदारी से खेल खेलूँगा, कोई बेईमानी या बदनीयती से ऐसा काम नहीं करूंगा ,जिससे खेल भावना को ठेस पहुँचे, सभी सुविधानुसार अपनी-अपनी भाषाओं में शपथ ले रहे थे,कोई अंत में कहता ” जय श्री राम”, जयहिन्द, ‘जय हनुमान’ ,हर-हर महादेव, जय भीम ,जय क्रिकेट ,जय क्रिकेट संविधान ,जय इंडिया, इसी बीच जिस एक खिलाड़ी की बोली नहीं लग पाई थी ,तय नहीं था किस टीम में है वो शायद रातभर जागकर टीवी पर फिलिस्तीन और इज़राइल युद्ध देखता रहा था, सोया नहीं होगा, उसने भी उर्दू में शपथ ली ,और अंत में ‘सभी की तरह “उसे अल्लाहु -अकबर” बोलना था लेकिन उसके मुँह से “जय फिलिस्तीन” निकला !उसपर टॉस विजेता टीम ने बड़ा हो हल्ला मचाया,इसे स्टेडियम से बाहर करो -बाहर करो ! दरसल उनका मकसद उसे बाहर करना नहीं ,बल्कि उनका मक़सद था कि यह डर कर बिना बोली लगाये ही उसकी टीम में आ जाये !

खैर ! अब प्रक्रिया पृरी हो गई थी ,फील्डिंग करने वाले मैदान में अपनी जगह और बैटिंग करने वाले अपनी क्रीज़ संम्भाल चुके थे , अंपायर भी ! इस खेल में अंपायरिंग का अलग नियम है ,इसमें अंपायर कुर्सी में बैठा रहेगा ,जब कोई चौका या छक्का पड़ेगा ,तभी वह उठकर इशारा करेगा ,नो बॉल देनी हो या “वाइड” बाल का इशारा भी बैठे बैठे या खड़ा होकर कर सकता है ,जैसा हमलोग अक्सर टेनिस में देखते हैं ! दोनों टीमों के आने के बाद अब अंपायर अपना कान रगड़ते हुए अपनी सीट पर धम्म से आ बैठा ,उसके कान एकदम लाल थे मानों खून टपकने वाला है ,जैसा अक्सर बच्चों के कान लाल हो जाते हैं जब स्कूल में सजा मिलती है ,शायद अंपायर के भी कान खूब उमेठे गये थे ,ताकि उसे बखूबी याद रहे कि करना क्या है ?

पहला ओवर शुरू हुआ ,कमेंट्री भी चल रही थी, यह बॉलर काफी फ़ास्ट था ,छै गेंदों में बैट्समैन तीन बार बीट हुआ ,एक भी रन नहीं बना ,यह ओवर मैडन गया ,चारो तरफ “इंडो -इंडो” गो – अहेड, इंडो- इंडो के नारे से स्टेडियम गूंज उठा ! अब दूसरा बॉलर आया ,वो लाल रंग की कैप (टोपी) पहने था ,आते ही उसने अंपायर को टोपी पकड़ा दी ! क़दम नापते ही लगा था कि आज ये कुछ अधिक फ़ास्ट बॉलिंग करने वाले हैं , उसके रन करते ही जोर जोर से शोर उठने लगा , पहली बाल ही आउट स्विंगर थी ,बल्ले और गेंद के बीच एक इंच का फासला रह गया था ,इसी प्रकार पूरी छै बालों में बैट्समैन बीट हुआ , अंपायर ने देखा चारो तरफ तालियाँ और इंडो-इंडो के शोर ने सुनाई पड़ रहे , तभी उसकी नज़र पसीना पोछते कप्तान,उपकप्तान के चेहरे से टकरा गई ,उन्होंने घूरकर अंपायर की तरफ देखा , अंपायर उन्हें देखकर असहज हो गया ,अपना कान सहलाने लगा ,उसे अपना कान उमेठने की याद आने लगी !

अब तीसरे ओवर की पहली ही गेंद के लिए दौड़ लगानी चालू की उसने इस बार इनस्विंगर फेंकी थी बैट्समैन समझ नहीं पाया और गेंद उसके बल्ले को बचाते हुए विकेट की तरफ गई , लेकिन गेंद स्टम्प की गुल्लियों से थोड़ा ऊपर निकल कर विकेट कीपर के हाथों में आ गई ! बॉलर को बैट्समैन की कमियां पता चल गईं थी उसका यकीन था इस गेंद से उसका स्टम्प दूर जाकर गिरेगा ! बॉलर दौड़ते समय लग रहा था कि वह रफ्तार के सभी रिकार्ड तोड़ देगा , बॉलर तेज गति से जब तक गेंद फेंकता ,अंपायर ने बाल न फेंकने का इशारा किया , बॉलर इतनी स्पीड में था कि वह बैट्समैन के विकेट तक पहुंच गया ! इसी बीच बैट्समैन को अंपायर ने इशारे से कुछ पूछा , बैट्समैन ने आसमान की तरफ देखा , अंपायर समझ गया ये अगर खेला तो इस ओवर में आउट हो जाएगा ! अंपायर ने दोनों हाथ हिलाकर मैच रोकने का इशारा किया , खराब रौशनी के बहाने मैच दो घण्टे के लिये रोक दिया गया !

अब मैदान से बाहर जाते वक़्त फ़ील्डिंग टीम के कप्तान ने अंपायर से हाथ मिलाया ,लेकिन अंपायर बड़ी हैरत से देख रहा था कि ये कप्तान सब जानते हुए भी मुस्कुरा क्यूँ रहा है ,और उसके बाकी साथी भी !

अभी खेल चालू होने में दो घण्टे का समय था ,सभी अपनी नई रणनीति के साथ उतरने की सलाह मशविरा में लग गए , बैटिंग टीम परेशान थी ,कैसे इन बॉलरों का सामना किया जाए ,हम तो सारे बैट्समैन पर ही बोली लगा चुके हैं ,यही हाल रहा तो ये मैच जल्दी ही हम लोग हार सकते हैं , उन्होंने अंपायर को फिर से हिदायत दी ,और टीवी. कवरेज वाले को भी घूर कर देखा ! वह समझ गया !

फिर पहले की तरह दोनों टीमों के खिलाड़ी अपनी जगह आकर मुस्तैदी से खड़े हो गए ! बॉलर अपनी पूरी तैयारी के साथ पिच पर दौड़ने लगा , उफ क्या गज़ब की गेंद थी ,देखने वालों की साँसे थम गईं ,वह मुस्कुराता हुआ फिर अपने रनवे की तरफ बढ़ गया ,इस बार उसने सोच लिया था कि कौन सी गेंद डालनी है ,इसका स्टम्प उड़ाकर रहूंगा ! उसने तेज गति से गेंद फेंकी और यह क्या ! बैट्समैन समझ ही नहीं पाया और बीच का स्टम्प उखड़कर दूर जा गिरा,अब अंपायर को जैसे होश आया ,विकेट उखड़ने के बाद उसने “नो” बॉल का इशारा किया !

फ़ील्डिंग कप्तान का पारा भी सातवें आसमान पर पहुँच गया ,बॉलर कप्तान ही थे ,उन्होंने और तमाम खिलाड़ियों ने अंपायर को घेर लिया ,ये नो बॉल नहीं है ,तीसरे अंपायर से पूछिए , अंपायर भी मरता क्या न करता ,उसने टीवी. फुटेज दिखाने को इशारा किया ,दो मिनट बाद लिखकर आया ” नो विज़न” ” नाट क्लियर” ,इसका क्या मतलब है जब आपका खिलाड़ी आउट हो जाये तो आप कैमरा ही बन्द कर देंगे, इस तरह मैच नहीं खेला जाएगा , मुख्य रेफरी जी को फोन लगाइए जिन्होंने कहा था ,किसी प्रकार का पक्षपात नही किया जाएगा ,किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं चलेगी ! वह आउट है उसे आउट दीजिये ! आप अंपायर है सही निर्णय लीजिए ,नहीं तो कोई दूसरा अंपायर आएगा ! और चीफ रेफरी का फोन आने के बाद अंपायर को उस खिलाड़ी को आउट करार देना पड़ा , और कप्तान से यह भी कहा अब दोबारा ऐसा नहीं होगा , चीफ रेफरी ने निर्देश भिजवा दिए है , और पूरे स्टेडियम की जनता ने जब यह देखा तो गज़ब का शोर चारो ओर से उठने लगा “इंडो-,इंडो ज़िंदाबाद , दानी-बानी मुर्दाबाद ! अब ये दानी -बानी कौन हैं जिनके मुर्दाबाद के नारे बुलन्द हो रहे हैं ,किसी से पूछा तो उसने बड़ी हैरत से पूछा – आपको नहीं पता , उसने कहा अरे सब को पता है इस बैटिंग टीम के वही फाइनेन्सर हैं , हम लोग जो टिकट लेकर आये हैं , यहां जितने स्टाल लगे हैं ,सारा पैसा उन्हीं के पास जाएगा, तो अब उनका भी मुर्दाबाद तो बनता है न भाई ! इनके खिलाड़ी तक खरीद के रखे हैं , ये मैदान में हर स्टाल पर उनका कमीशन ,हम जो खाएं , उसपर कमीशन,हम जो पहनें उसपर कमीशन, रेल उन्हीं का ,जहाज उन्हीं का, हम भी भैया बड़ी दूर से आये हैं मैच देखने , हम तेलंगाना के हैं ,हमारी ससुराल बिहार में है , हम तो इसलिए आये हैं कि हमारे तेलंगाना और बिहार के खिलाड़ी दूसरी पाली को छोड़कर अपनी पाली में आ जाएं ! अब खेल चालू हो रहा था , जानता तो सब हूँ , मगर पड़ौसी के विचार भी जानने चाहिए !

फ़ील्डिंग वाली टीम के अंदर गजब का विश्वास था ,स्टेडियम का बहुत सपोर्ट मिल रहा था ,पहला ओवर शुरू हुआ ,फ़ील्डिंग वाले उपकप्तान ने मोर्चा संभाला था ,जब वह अपनी टोपी अंपायर को पकड़ाते सारे खिलाड़ी मुस्कुराते रहते थे , वो भी बेहद फ़ास्ट बॉलर हैं ,पहली बाल में एक रन ही मिल सका , अब यही तो वह चाहते थे अंपायर के साथ क्रीज पर खड़ा खिलाड़ी सामने आए !, अब उन्होंने इन स्विंग फेंकी , गेंद बल्ले से टकराकर सीधे विकेट में घुस गई !
और आउट ! अंपायर ने बिना बोले ऊँगली उठा दी और टीवी. पर भी आ गया आउट , ! अब तक दो खिलाड़ी आउट हो चुके थे ! अब नया खिलाड़ी क्रीज पर आ गया अपनी लाइन बनाने लगा , तभी उपकप्तान बॉलर ने पैवेलियन की तरफ जोर से हाथ हिलाया ,उधर से एक सीनियर खिलाड़ी ने खड़े होकर हाथ हिलाया , दरसल उपकप्तान अपने उस बड़े खिलाड़ी को पैवेलियन में आगे ही बैठा आये थे , जिसने पिछले मैच में छै बाल पर छै छक्के लगाए थे , ताकि विपक्षी भी देख सकें जब ये मारेंगे ,तो गेंद भी ढूँढने का इंतजाम रखना !

बॉलर ने कुछ और सोच रखा था ,बाल की स्पीड भी कम रखी थी जिससे खिलाड़ी कोई शॉट मार सके , खिलाड़ी ने एक चौका जड़ा ! ‘नीडी -नीडी ” की आवाज़ें सुनाई पड़ीं ! अब ओवर में तीन गेंद और थीं , चौथी गेंद स्टम्प के सामने खिलाड़ी के पैड से टकराई ,आऊट -आऊट (LBW) की अपील की गई , अंपायर ने स्क्रीन की तरफ इशारा किया , NOT OUT लिखकर आया , बॉलर फिर अगली गेंद की तरफ बढ़ गया ,वह मुस्कुराता जा रहा था , उसके हँसने की तस्वीर स्क्रीन पर देखकर विरोधियों के मुँह पर ताले लग गए थे वह उस बॉलर की तेज रफ्तार देख रहे थे , तभी बल्ले से टकराकर गेंद हवा में उछली और विकेटकीपर ने कैच लपक लिया ,सारे खिलाड़ी एक दूसरे की तरफ देख खुशी से उछल पड़े ! ओवर की आखिरी गेंद भी फेंककर , बॉलर मुस्कुराते हुए कप्तान को गेंद थमा देते हैं ! आज के मैच का आखिरी ओवर बाकी था ,लेकिन क्रीज पर जैसे ही नया खिलाड़ी आया , कप्तान ने यह गेंद गुगली फेंकने में मशहूर महिला खिलाड़ी के हाथों की ओर उछाल दी ,इस खेल में पुरुषों के समान ही महिला खिलाड़ियों का स्थान भी सुरक्षित है , उसकी पहली ही बाल को देखकर बैटिंग पक्ष के कप्तान मैदान से बाहर चले गए ! उसने कहा भी पूरा ओवर तो देख के जाइये ! खराब रोशनी के कारण खेल को अगले दिन तक रोक दिया गया है !

अब पुनः खेल चालू होने में समय है दोस्तों ! आगे का आँखों सुना, कानों देखा हाल खेल चालू होने पर फिर आपके दरबार में हाज़िर करूँगा !

आशा है आप भी टीवी. पर मैच देख पा रहे होंगे ,अगर नहीं तो आप पढ़कर अन्दाज़ा लगा सकते हैं ,खेल बहुत ही दिलचस्प मोड़ पर है ,अभी तो शुरुआत का ये आलम है आगे और आनन्द आएगा ,कुछ अप्रत्याशित परिणाम भी !

यदि आपको अच्छा लगे तो अवश्य बताइएगा ,मैं आगे भी कोशिश करता रहूँगा ! इसे कोशिश ही कहूँगा क्योंकि यह मेरी लेखन शैली से अलग कोशिश है ! आप सबको शुभकामनाएं !

आपका अपना-
पीयूष अवस्थी
मुख्य सम्पादक

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