शब्द
मीठे भी होते हैं शहद से
नमकीन भी आंसुओं से
कड़वे भी धतूरे की तरह
शब्द बस शब्द होते है
स्वाद बदलता रहता है
वक्त के साथ साथ।
शब्द
नम होते हैं अश्को से
सूखे भी बंजर जमीन से
गीले भी होते दरिया जैसे
शब्द शब्द होते हैं
रूप बदलता रहता है
मौसम के साथ साथ।
शब्द
साबूत होते हैं चट्टान की तरह
रेत की तरह पिसे हुए भी
कंकर जैसे टूटे हुए भी कभी
शब्द बस शब्द होते हैं
आकार बदलता रहता है
हालात के साथ साथ।
शब्द
जोड़ जाते हैं
कभी तोड़ जाते हैं
मेल करा देते
दूरियां बढ़ा देते कभी
रेशम से मुलायम
चाकू से तीखे भी
शब्द के रूप अनगिन
शब्द के अर्थ अनगिन
शब्द बस शब्द है
और कुछ नही।।।
– संजय मृदुल
रायपुर
संपर्क 9098177600