तपन मिली है छाँव से

गीत - नवगीत

तपन मिली है छाँव से

शिव कुमार सिंह "कुँवर"

मंदिर -मदिर मतवारे नयना
सबसे अलग तुम्हारे नयना !!
सरसिज समझ भ्रमर मंडराये,
देख   इन्हें  खंजन  शरमाये,
बिन काजर कजरारे नयना !
सबसे अलग तुम्हारे नयना !!
इनमें बासन्ती तरुणाई, 
रत्नाकर जैसी गहराई,
ये अनुपम रतनारे नयना !
सबसे अलग तुम्हारे नयना !!
ये मृगशावक से चंचल हैं,
इठलाते उड़ते बादल हैं,
लगे कि ज्यों बनजारे नयना !
सबसे अलग तुम्हारे नयना !!
स्नेह- श्रोत के ये उदगम हैं
करुणा, ममता के संगम हैं,
प्रीति पगे अरुणारे नयना !
सबसे अलग तुम्हारे नयना !!

– शिव कुमार सिंह “कुँवर”
वरिष्ठ गीतकार
117/117 बी,पुरानी बस्ती,काकादेव,
कानपुर-208025

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