तुम आओ

कविता

तुम आओ

संजय कुमार सिंह

तुम आओ

आँखों में स्वप्न

डालियों में फूल

कि जैसे गाँव में स्कूल।

तुम आओ

जैसे देहरी पर दीप

साँसों में प्रीत,

होंठों पर गीत।

तुम आओ

नदियों में पानी

नसों में जवानी

यादों में रवानी बनकर।

तुम आओ

दाने में दूध  

दिल में उम्मीद बनकर

चाँद, तारे  तितली, बादल, मोर , सोन चिड़ैया…

तुम आओ

जैसे आती है सुबह

अँधेरे और सारी दूरियों को 

पाटकर!

कैसे विदा करोगी?

तुम किसे विदा करोगी

कुछ दोस्त, कुछ सखा,कुछ सहचर

कोई चिट्ठी, कोई याद..

प्यार विदा नहीं होगा!

वह बरसेगा मेह बनकर

खिलेगा फूल बनकर

बहेगी नदी तो उसकी धार में प्यार

बहेगी हवा, तो हर झोंके में प्यार

हर बेचैनी, हर गुस्से का विलोम प्यार!

आदमी तो आदमी

पत्थर पर अंकित चित्रलिपियों में भी 

युगों से अब तक अक्षुण्ण है वह

जो बैठा है मन में देहरी अगोर कर

उसे कैसे विदा करोगी?

साँझ से भोर तक

और भोर से साँझ तक

जो निहारता है हर छवि में चितचोर

उसे कैसे विदा करोगी?

तुम बुलाओ तो,,,

सुनो,

चुका हुआ तीर नहीं हूँ

न भटकी हुई  चिट्ठी

और न दिलजले की याद

कि लौटूँ ही नहीं।

तुम बुलाओ 

तो लौट आऊँगा!

जैसे लौटते हैं वसंत में फूल

जैसे लौटती हैं सावन में

बारिश की बौछाड़ें 

और

जैसे जल्दी से लौटती है

रात के गझिन अँधेरे के बाद

पहाड़ पर सुबह !

संजय कुमार सिंह

कटिहार  -854105

9431867283

( जन्म- 21 मई 1968 ई.नयानगर मधेपुरा बिहार।

शिक्षा- एम.ए. पी-एच.डी(हिन्दी)भा.वि.भागलपुर।

रचनात्मक उपलब्धियाँ- 

हंस, कथादेश, वागर्थ, पाखी, दोआबा, साखी ,नवनीत, साहित्य सरोज, हिन्दुस्तानी जबान, मधुराक्षर ,प्राची, शब्दिता,नव किरण, मानवी, हस्ताक्षर, परिकथा, हिमतरु, अहा जिंदगी, कथाक्रम, कथाबिंब, ककसाड़, किस्सा, अक्षरा, विपाशा, गगनांचल, पश्यंती ,आजकल, वर्त्तमान साहित्य, दूसरा मत, कहन, नया,  गूंज, संवेद, संवदिया, पल,प्रतिपल, सृजन लोक,साहित्य यात्रा, पाठ, सृजन सरोकार, हिमाचल साहित्य दर्पण, मुक्तांचल, संवेद, संवदिया, संस्पर्श, वेणु, अर्य संदेश, कला,वस्तुत:,आलोक पर्व, उमा, अर्य संदेश,अभिनव इमरोज, गूँज, शीतल वाणी, अलख, एक और अंतरीप, लोकमत, स्वाधीनता, शोध-सृजन, समकालीन अभिव्यक्ति, सरोकार,समय सुरभि अनंत, एक नयी सुबह, परती पलार, दि न्यूज आसपास, छत्तीस गढ़ मित्र, अनामिका, जनतरंग,उमा, किताब, चिंतन-सृजन, दैनिक हिन्दुस्तान, नई बात, जनसत्ता, प्रभात खबर आदि पत्र-पत्रिकाओं में कहानियाँ, कविताएँ,आलेख व समीक्षाएँ प्रकाशित।

प्रकाशित कृतियाँ-

1 टी.वी.में चम्पा (कहानी संग्रह) सस्ता साहित्य मंडल दिल्ली

2 रंडी बाबू ( कहानी- संग्रह)जे.बी.प्रकाशन नई दिल्ली

3 कैसे रहें अबोल( दोहा-संग्रह)यश प्रकाशन दिल्ली

4 धन्यवाद-( कविता संग्रह) नोवेल्टी प्रकाशन पटना।

5 वहाँ तक कोई रास्ता नहीं जाता-(कविता-संग्रह)अधिकरण प्रकाशन दिल्ली।

6 लिखते नहीं तो क्या करते-(कविता-संग्रह) वही।

7 रहेगी ख़ाक में मुंतज़िर-(उपन्यास) वही

8 सपने में भी नहीं खा सका खीर वह!(उपन्यास) वही

9 समकालीन कहानियों का पाठ-भेद( आलोचना की पुस्तक)यश प्रकाशन दिल्ली।

10- कास के फूल( संस्मरण)वही

सम्प्रति- प्रिंसिपल,डी.एस. कालेज कटिहार  -854105

9431867283

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