तुम अब मत आना – अम्बिका कुमारी कुशवाहा

Ambika Kushwaha

तुम अब मत आना

– अम्बिका कुमारी कुशवाहा

जब भी जागूँ मैं निंद्रा से
तुम ख्यालों में मेरे मत आना

उदित किरणों की आंनदित ऊष्मा से
तुम काया कण में मेरे मत आना

मत आना मेरी किस्सों बातों में
मेरे ख्वाबों में भी तुम मत आना

दर्पण में स्वयं की बिम्बों से
तुम साया बन मेरी मत आना

मत आना मेरे सपनों में
मेरी अनुभूति में भी तुम मत आना

मैं गिरकर भी चलना सीख चुकी हुँ
अब मुझे संभालने तुम मत आना

मत आना मेरी साँसों की शोरों में
मेरी ह्रदय तरंगों में भी तुम मत आना

मैं अनंत प्रतीक्षा में डूब चुकी हूँ
अब विकल्प डोर संग तुम मत आना

टूट चुके है प्रेम प्रीत के धागे
तुम गांठ जोड़ने भी मत आना

मैं खामोशी से आगे बढ़ जाऊँगी
सांझ ढलें लौट तुम भी जाना

तुम मुझसे मिलने अब मत आना
तुम अब मत आना।।

– अम्बिका कुमारी कुशवाहा 

पटना (बिहार)

ई-मेल : kumariambika78@gmail.com

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