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प्रेमलता यदु
खूबसूरती व रूप-रंग के आगे सादगी को एक बार फिर अपने घुटने टेकने पड़े. आज एक बार फिर काजल का दिल टूट कर बिखर गया. यह बात अलग है कि उसके दिल टूटने की आवाज उन लोगों तक पहुंची ही नही जिन लोगों ने बड़ी ही निष्ठुरता, असंवेदनशीलता व कागज के चंद टुकड़ों की लालच में काजल के स्वाभिमान व उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाया था.
हमारे समाज में ना जाने कब से ऐसा ही चला आ रहा है. किसी भी लड़की की योग्यता को जाने समझे बगैर ही मात्र उसके ऊपरी तौर पर दिखाई देने वाले रंग रूप व कद काठी के आधार पर ही उसे अस्वीकार कर दिया जाता हैं. उसके आत्मसम्मान की धज्जियां उड़ा दी जाती हैं और उनके इस अशोभनीय कृत्य पर हमारा समाज मौन साधे रहता है.
आज एक बार फिर जैसे ही लड़के वालों की तरफ से यह संदेश मिला कि उन्हें काजल पसंद नहीं है क्योंकि उसका रंग दबा हुआ है. पूरे घर पर मायूसी छा गई. मां की आंखें डबडबा गई. पिता जो वैसे ही कम बोलते हैं और अधिक शांत मुद्रा में चले गए. भाभी पहले से अधिक तेज़ आवाज़ में मां से कहने लगी-
“मैं तो जानती ही थी, दीदी का जैसा रंग रूप है लड़के वाले सुरसा के ही तरह अपना मुंह खोलेंगे. मैंने तो कई बार दीदी से कहा भी पढ़ाई-लिखाई छोड़ो, थोड़ा बन संवर कर रहा करो, पर वो सुने तब ना. “
पिछले दो सालों से काजल हर बार लड़के वालों के समक्ष किसी वस्तु की तरह सजाई जाती. नुमाइश के बाजार में लगाई जाती और हर बार उसे अस्वीकार का दंश सहना पड़ता. इस बार भी लड़के वालों की तरफ से काजल की सादगी के एवज में मोटी रकम की मांग रखी गई है. बावजूद इसके मां के भीतर आशा की एक किरण अब भी बाकी थी क्योंकि इस दफे लड़के वालों की ओर से पिछली बार की अपेक्षा काजल की सादगी व उसके फ़ीके रंग रूप की थोड़ी कम कीमत मांगी गई थी. ऐसा इसलिए भी था क्योंकि काजल प्राशासनिक सेवा की मुख्य परीक्षा में सम्मिलित हुई है.
लड़के वालों ने यह शर्त रखी है कि यदि काजल प्रशासनिक सेवा में चयनित हो जाती है तो उन्हें और कुछ नहीं देना होगा अन्यथा मांग में बढ़ोतरी कर दी जाएगी. मां को पूरी उम्मीद है कि काजल प्रशासनिक सेवा में चयनित हो ही जाएगी. उन्हें अपनी हैसियत से अधिक कर्ज लेकर दहेज नहीं देना पड़ेगा और उनकी बेटी के हाथ भी पीले हो जाएंगे. लड़के वालों की तरफ से इस तरह से मांग रखने का सीधा अर्थ इस बात की ओर इंगित कर रहा था कि अब दहेज का अभिप्राय कामकाजी व कमाऊ लड़की हो गई है.
जब काजल इन सारी वस्तुस्थिति से अवगत हुई तो उसने यह शादी करने से इंकार कर दिया. काजल के इस निर्णय से पूरे घर में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई. भाभी की भौंहें तन गई. मां विलाप करने लगी किन्तु पिता तटस्थ रहे. अपने पिता की ओर से कोई प्रतिक्रिया ना पा कर काजल अपने पिता के पास जा कर बोली –
” बाबू जी क्या मेरा यह निर्णय गलत है…? आपने मुझे पढ़ाया लिखाया और इस काबिल बनाया है कि आज मैं अपने पैरों पर खड़ी हो सकती हूं फिर क्यों मैं उस घर में ब्याह कर जाऊं, जहां मुझे केवल इसलिए अपनाया जा रहा है कि कल मैं उनके लिए पैसे कमाने की मशीन साबित हो जाऊंगी . बाबू जी मैं विवाह अवश्य करूंगी लेकिन वहां, जहां मेरे रंग रूप का सौदा नहीं होगा. जहां मुझे रूपए छापने की मशीन नहीं समझा जाएगा. मैं जैसी हूं मुझे वैसे ही अपनाया जाएगा. मैं उस घर में ब्याह कर नहीं जाना चाहती जिस घर में दहेज के लालची रहते हों. जो आजकल की कामकाजी व कमाऊ लड़की को दहेज का विकल्प समझते हों. “
काजल की बातें सुन पिता की आंखों में चमक आ गई और जो अब तक मौन साधे बैठे थे गर्व से बोले-
“बेटा यदि हर बेटी के विचार ऐसा हो जाएं तो किसी भी पिता के ना कंधे झुकेंगे, ना आंखें और ना ही किसी पिता को चुप्पी साधने की जरूरत पड़ेगी.”
पिता पुत्री की बातें सुन मां का चेहरा खिल गया और भाभी के तेवर भी नर्म पड़ गए .
प्रेमलता यदु
बिलासपुर छत्तीसगढ़
75872-71678
“हर्षांचल”, 46, ज़ीनत विहार, फेस-2, अन्नपूर्णा कॉलोनी के पास, गणेश नगर, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ 495004