लेखकों / पाठकों से निवेदन

शब्दकार प्रकाशन

पीयूष अवस्थी

मुख्य सम्पादक "शब्दकार" पत्रिका®, शब्दकार प्रकाशन®

प्रिय दोस्तों ! मेरे अज़ीज़ों !
साहित्यिक -सामाजिक चेतना की प्रगतिशील ई -पत्रिका ” शब्दकार” का शुभारम्भ हुआ है , तमाम साथियों ने अपनी रचनायें प्रेषित की हैं ,जिनमें फिलहाल चयनित की गई रचनाओं को इस अंक में स्थान दिया गया है , कुछ रचनायें विचारार्थ हैं,जिन्हें सम्भवतः अगले अंक में प्रकाशित किया जायेगा !
आप साहित्य की लगभग सभी विधाओं में अपनी रचनायें भेज सकते हैं ! गीत,ग़ज़ल, दोहे, पद, हास्य-व्यंग्य ,लघुकथा, किस्सा-,कहानी, व्यंग्य लेख, समय की आवाज़, यात्रा- वृतांत, ज्ञान की बातें, किताबों की समीक्षा आदि -आदि !

आपकी रचनायें मौलिक होनी चाहिए व अप्रकाशित भी !
रचनायें word फ़ाइल में कृतिदेव के किसी भी फॉन्ट में ,उसका pdf व cdr या docx भी भेजें ,साथ ही अपना नाम ,चित्र, संक्षिप्त परिचय, पता, मोबाइल नम्बर ,ई-मेल जो भी उपलब्ध हो ,साथ ही प्रेषित करें !
आपकी टाइप की हुई रचनायें 12-14 साइज में होनी चाहिए ,आपने जिस फॉन्ट का उपयोग किया है ,उसे भी अवश्य अंकित कर दीजिए !

स्वीकृत और विचारार्थ रचनाओं के सम्बंध में ही आपको सूचना प्रदान की जाएगी ! हम किसी ऐसी रचनाओं को स्वीकार नहीं करते जो समाज की भावनाओं को ठेस पहुँचाती हों ,किसी वर्ग या किसी विशेष समुदाय, किसी राजनैतिक पार्टी के समर्थन या आलोचना से ग्रसित हों !

आपको इसकी वेबसाइट द्वारा आपको इसका लिंक प्रेषित किया जाएगा ,जिससे आप अपने कम्प्यूटर या मोबाइल पर आसानी से सरल रूप से पाठन कर सकें ! अपनी प्रतिक्रिया भी दे सकें, जो अगले अंक में प्रकाशित की जाएंगी ,आपकी प्रसंशा ,सुझाव, आलोचना, समालोचना , मार्गदर्शन हमारी पत्रिका के लिए पारितोषक के समान होगा !

आप हमारे “शब्दकार प्रकाशन” के माध्यम से अपनी किताबें प्रकाशित करा सकते हैं ! इस विषय पर अलग से सूचना इस अंक में समाहित की गई है !

यह प्रवेशांक आपको उपहार स्वरूप प्रदान किया जाएगा ,इसका कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, आगामी अंक में यह शुल्क मात्र ₹ 30/- प्रतिमाह होगा,इसमें अर्द्धवार्षिक व वार्षिक शुल्क का भी विकल्प रखा जाएगा, जिसमें आपको छूट प्रदान की जाएगी !

हमारा मुख्य उद्देश्य साहित्य को समाज मे ज़्यादा से ज़्यादा प्रसारित करना है , जिससे साहित्यिक चेतना के साथ सामाजिक प्रगति की चेतना भी समाज में गौरव के साथ अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सके !

आप सभी बुद्धिजीवी हैं , साहित्य का अर्थ समझते हैं , आप स्वयं रचयिता भी है ,तो क्यूँ न हम सब का साहित्य पूरे विश्व में दीप्तिमान हो, आपका सहयोग मिलता रहा तो निश्चित ही यह ” शब्दकार” पत्रिका तमाम अचर्चित शब्दकारों को उनकी पहचान स्थापित करने में उनका सहभागी बनेगा ,और इसमें साहित्य में पदार्पण करने वाले युवा साथियों के लिए एक स्थायी कॉलम ” आते हुये लोग” भी जोड़ा जाएगा,जिसमें नये चेहरों को उचित स्थान प्रदान किया जायेगा ! ताकि वे भी शब्दकार परिवार का हिस्सा बन सकें !

आप सभी को “शब्दकार परिवार” की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं !

शब्दकार परिवार

 

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